हिंदी भाषा के विकासक्रम का विस्तार से वर्णन कीजिए।
प्रस्तावना
हिंदी भारत की प्रमुख आधुनिक भारतीय-आर्य भाषाओं में से एक है। हिंदी का वर्तमान स्वरूप एक लंबी भाषायी विकास-प्रक्रिया का परिणाम है। हिंदी का विकास क्रमशः अपभ्रंश और अवहट्ठ से पुरानी हिंदी, मध्यकालीन हिंदी तथा आधुनिक हिंदी तक हुआ। विद्वानों ने हिंदी के प्रारंभ और उसके विकास-काल को लेकर अलग-अलग मत प्रस्तुत किए हैं, किंतु आधुनिक भाषावैज्ञानिक दृष्टि से लगभग 1100 ईस्वी के आसपास पुरानी हिंदी से हिंदी के विकास को स्वीकार किया जाता है।
हिंदी भाषा का विकासक्रम
हिंदी के विकास को मुख्यतः निम्नलिखित तीन चरणों में बाँटा जा सकता है—
1. प्राचीन हिंदी — लगभग 1100 से 1350 ईस्वी
हिंदी के विकास की प्रारंभिक अवस्था को प्राचीन हिंदी या पुरानी हिंदी कहा जाता है। यह अवस्था अपभ्रंश और आधुनिक भारतीय भाषाओं के बीच की संक्रमण अवस्था थी।
इस समय हिंदी का प्रारंभिक रूप धीरे-धीरे स्वतंत्र रूप ग्रहण करने लगा। लगभग 13वीं–14वीं शताब्दी में हिंदी तथा उसकी विभिन्न बोलियों का स्वतंत्र अस्तित्व अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगा। विद्वानों ने इस काल की हिंदी के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया है।
इस प्रकार प्राचीन हिंदी वह अवस्था है जिसमें हिंदी ने अपने पूर्ववर्ती भाषायी रूपों से अलग होकर स्वतंत्र पहचान बनानी शुरू की।
2. मध्यकालीन हिंदी — लगभग 1350 से 1850 ईस्वी
हिंदी के विकास का दूसरा चरण मध्यकालीन हिंदी कहलाता है। इसका काल लगभग 1350 से 1850 ईस्वी तक माना जाता है। इस काल में हिंदी के विभिन्न क्षेत्रीय और साहित्यिक रूपों का विकास हुआ।
इस अवधि में हिंदी की विभिन्न बोलियों का प्रयोग बढ़ा और हिंदी साहित्य का भी व्यापक विकास हुआ। हिंदी ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परिस्थितियों के प्रभाव से अपने शब्द-भंडार तथा अभिव्यक्ति के रूपों को समृद्ध किया।
3. आधुनिक हिंदी — 1850 ईस्वी से वर्तमान तक
हिंदी के विकास का तीसरा चरण आधुनिक हिंदी है, जिसका काल लगभग 1850 ईस्वी से वर्तमान समय तक माना जाता है। इस काल में हिंदी के आधुनिक स्वरूप का विकास और मानकीकरण हुआ।
आधुनिक हिंदी के विकास में खड़ी बोली का विशेष महत्व है। वर्तमान मानक हिंदी मूलतः खड़ी बोली का विकसित और संशोधित रूप मानी जाती है। खड़ी बोली का मूल क्षेत्र दिल्ली, मेरठ, आगरा, पानीपत और अंबाला आदि के आसपास माना गया है।
समय के साथ खड़ी बोली का साहित्य, शिक्षा, प्रशासन और संचार के क्षेत्र में प्रयोग बढ़ता गया और आधुनिक मानक हिंदी के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हिंदी के विकासक्रम को संक्षेप में
अपभ्रंश → अवहट्ठ → प्राचीन/पुरानी हिंदी → मध्यकालीन हिंदी → आधुनिक हिंदी
या हिंदी के काल-विभाजन को इस प्रकार याद किया जा सकता है:
हिंदी का चरण काल
प्राचीन हिंदी 1100–1350 ई.
मध्यकालीन हिंदी 1350–1850 ई.
आधुनिक हिंदी 1850 ई. से वर्तमान
उपसंहार
अतः हिंदी भाषा का विकास एक क्रमिक और निरंतर प्रक्रिया का परिणाम है। अपभ्रंश और अवहट्ठ जैसी पूर्ववर्ती भाषायी अवस्थाओं से विकसित होकर हिंदी ने प्राचीन हिंदी का रूप ग्रहण किया। इसके बाद मध्यकालीन हिंदी में इसका व्यापक विकास हुआ और 1850 ईस्वी के बाद आधुनिक हिंदी का स्वरूप अधिक स्पष्ट हुआ। आधुनिक काल में खड़ी बोली के आधार पर हिंदी का मानकीकरण हुआ और आज हिंदी भारत की प्रमुख आधुनिक भाषाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

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